सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची की जांच करने की शक्ति बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में चुनाव आयोग के मतदाता सूची की समरी रिवीजन (SIR) करने के अधिकार को वैध ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

उदित वाणी, नई दिल्ली 27 May, 2026 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग के उस अधिकार की पुष्टि की, जिसके अंतर्गत वह मतदाता सूची की समरी रिवीजन (SIR) कर सकता है। इस निर्णय के साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची की जांच और पुनरावलोकन संबंधी शक्तियों को बरकरार रखा है। अदालत में याचिका के माध्यम से चुनाव आयोग की इस शक्ति को चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आयोग को यह अधिकार संविधान द्वारा प्राप्त है। कोर्ट ने माना कि मतदाता सूची का पुनरावलोकन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने का दायित्व है कि प्रत्येक चुनाव में शामिल होने वाले मतदाताओं की जानकारी अद्यतित और प्रमाणिक हो। अदालत ने आयोग को यह अधिकार देना भारतीय लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता के हित में बताया।

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