उदित वाणी, मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के वर्षों में सबसे बड़ा घटनाक्रम शिवसेना के भीतर हुआ विभाजन रहा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए इस बगावत को ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया, जिसके तहत पार्टी के कई विधायक पार्टी नेतृत्व से अलग हो गए और पार्टी में बड़ा बदलाव हुआ। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्ता व्यवस्था को ही बदल दिया।
शिंदे गुट के उदय की पूरी कहानी
शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जाहिर करते हुए चुनिंदा विधायकों के साथ मिलकर बड़ी बगावत की। सूत्रों के अनुसार, इस ‘ऑपरेशन टाइगर’ की शुरुआत गुप्त बैठकों से हुई, जिसमें पार्टी के असंतोषी विधायकों ने नेतृत्व को लेकर खुलकर चर्चा की। धीरे-धीरे विधायकों की संख्या बढ़ती गई और स्थिति शिवसेना के लिए गंभीर होती गई।
महाराष्ट्र की राजनीति में आए भूचाल
एकनाथ शिंदे की इस बगावत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई। एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर बनी महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार पर संकट के बादल घिर गए और सत्ता संतुलन बदल गया। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि दलों के भीतर असंतोष किस तरह बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।
भविष्य पर पड़ेगा बड़ा असर
शिवसेना के इस बंटवारे के बाद पार्टी की छवि और समर्थकों के बीच विश्वास को झटका लगा है। साथ ही, महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण में भी स्थायित्व पर सवाल उठे हैं। शिंदे गुट के आगे आने और पार्टी का दो हिस्सों में बंटना भविष्य में भी राज्य की राजनीति पर असर दिखा सकता है।
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