उदित वाणी, जमशेदपुर : आईआईटी में अब टॉपर्स का रुझान नई तकनीकों की जगह पारंपरिक शाखाओं, विशेष रूप से सिविल इंजीनियरिंग, की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। वर्षों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसी ब्रांचेस को सबसे अधिक प्राथमिकता मिलती रही, लेकिन हाल के दाखिलों में इस ट्रेंड में बड़ा उलटफेर देखा गया है।
आईआईटी दाखिलों में पारंपरिक शाखाओं की वापसी
पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी टॉपर्स बड़ी संख्या में कंप्यूटर साइंस और एआई जैसे सब्जेक्ट्स को पहली पसंद बना रहे थे। किंतु इस बार के रुझान से दिख रहा है कि छात्रों का ध्यान फिर से सिविल इंजीनियरिंग जैसी ब्रांचों की ओर जा रहा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका एक प्रमुख कारण इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेक्टर में बढ़ते अवसर हो सकते हैं।
कैरियर और समाज सेवा की ओर रुझान
छात्रों का मानना है कि सिविल इंजीनियरिंग में न केवल करियर के अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं, बल्कि समाज के निर्माण और देश के विकास में योगदान देने का भी अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, कुछ छात्रों की यह भी राय रही है कि पारंपरिक शाखाओं में स्थायित्व और दीर्घकालिक सफलता की संभावना अधिक है।
तकनीकी बदलाव और नई सोच का परिणाम
विशेषज्ञों के अनुसार, आईआईटी में ब्रांच चयन का यह बदलाव छात्रों की बदलती सोच का प्रमाण है। अब युवा सिर्फ ट्रेंड के पीछे नहीं भागना चाहते, बल्कि वे समाज, पर्यावरण और बुनियादी संरचनाओं से जुड़े कामों में भी सक्रिय भूमिका निभाने को इच्छुक हैं। यह ट्रेंड देश के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कीवर्ड्स (Keywords): आईआईटी, सिविल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टॉपर ट्रेंड, शिक्षा, ब्रांच चयन, तकनीकी शिक्षा






