उदित वाणी, जमशेदपुर : G20 देशों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने हाल ही में हुई बैठक में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों एवं भविष्य की विकास रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस दौरान वैश्विक व्यापार को अधिक संतुलित और मजबूत बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
नवाचार और डिजिटल परिवर्तन पर बल
बैठक में सदस्य देशों ने नवाचार, हरित ऊर्जा, डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में परस्पर सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता विशेष रूप से रेखांकित की। यह भी उल्लेख किया गया कि विकासशील देशों को तकनीकी सहायता एवं निवेश उपलब्ध कराने से वैश्विक आर्थिक वृद्धि को नई गति मिल सकती है।
MSME और रोजगार के संदर्भ में साझा प्रयास
प्रतिनिधियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और डिजिटल परिवर्तन को तीव्र करने के लिए संयुक्त प्रयत्नों की अनिवार्यता जताई। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा में निवेश को प्रोत्साहित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
आर्थिक नीति निर्धारण में G20 की प्रमुख भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि G20 जैसे मंचों पर होने वाले संवाद वैश्विक आर्थिक नीतियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सदस्य देशों के बीच सहयोग और समन्वय लगातार मजबूत होने से व्यापार, निवेश, रोजगार और आर्थिक स्थिरता को दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं। G20, दुनिया की लगभग 85% वैश्विक GDP और 75% अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसके निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
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